Lost Ancient Temples of Raisen : Bhadner & Motalsir Temples
रायसेन के गुमनाम प्राचीन मंदिर : भादनेर और मोतलसिर के मंदिर
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| भादनेर ग्राम (रायसेन) का प्राचीन मंदिर |
साथियों आज के साप्ताहिक ब्लॉग में फिर आपका स्वागत है। किसी कारणवश यह ब्लॉग पोस्ट करने में काफी समय लग गया है जिसके लिए मुझे खेद है। जैसा कि आप जानते ही है कि मैं रायसेन और विदिशा जिले के उन मंदिरो पर विशेष सीरीज लिख रहा हूँ जो बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक रहे है पर धीरे-धीरे किसी कारणवश अब यह अपने अंतिम चरण में है या लगभग नष्ट होने की कगार पर है। अपनी खोज में मैंने यह पाया है कि रायसेन जिला पुरातात्विक दृष्टि से बहुत समृद्ध है। यहाँ प्रागेतिहासिक काल से लेकर आधुनिक इतिहास के सभी साक्ष्य मिलते है। रायसेन जिले में भीमबेटका, उर्देन ,खरबई, पेनगवां , डूमावली और ना जाने कितने अनगिनत शैलाश्रय फैले हुए जो यह बताते है कि मानव सभ्यता का शुरुआत रायसेन जिले से ही हुआ था।
इसी क्रम में मैं जल्दी ही रायसेन की पुतली करार की शैलचित्र और टिकोदा ग्राम को जल्दी ही कवर करूँगा जहां से लगभग 1.5 मिलियन वर्ष पूर्व के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले है जो भारत के इतिहास की दृष्टि से दुर्लभ स्थान है ।
आज के ब्लॉग में हम पुनः रायसेन जिले के दो ऐसे मंदिरो के बारे में बात करेंगे जो लगभग एक हजार वर्ष प्राचीन होने के बाद भी हम लोग इन मंदिरो को भुला दिए है। यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि हम अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के बारे जानने और उसे सरंक्षित करने के बारे में इतने लापरवाह है की हमें ही नहीं पता होता कि जहा हम रह रहे है वो स्थान का क्या इतिहास है और वहां की क्या धरोहर है। जो धीरे धीरे समय के साथ समाप्त या नष्ट हो रही है।
"और कहा भी जाता है कि यदि अपना इतिहास नहीं जानोगे तो खुद को कैसे पहिचानोगे "
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| भादनेर ग्राम जिला रायसेन का प्राचीन मंदिर |
Bhadner Village भादनेर ग्राम जिला रायसेन का परमार कालीन मंदिर :
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| भादनेर ग्राम जिला रायसेन का प्राचीन मंदिर |
भादनेर ग्राम रायसेन से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. हम में से 99 % लोग नहीं जानते होंगे कि इस ग्राम में एक हजार साल प्राचीन परमारकालीन मंदिर है। हालांकि यह बहुत एक छोटा सा गांव है पर इस गांव में एक परमार कालीन मंदिर के अवशेष विद्यमान है जो इस ग्राम को विशेष बनाता है । मंदिर गांव के पश्चिम दिशा में बना हुआ है. मंदिर के भग्नावशेष से स्पष्ट है कि मंदिर पश्चिम मुखी रहा होगा. देखने पर यह भी पता चलता है यहाँ स्थित मंदिर बड़े पैमाने पर निर्मित था जिसमें मुख मंडप, महामंडप, अंतराल, अर्ध मंडप विद्यमान है. मंदिर के वेदिबंध मलबे में दबे हुए हैं. यदि यहाँ खुदाई की जाये तो कई अवशेष मिल सकते है और मंदिर का अन्य भाग भी सामने आ सकता है। मंदिर परमारकालीन है पर कब बना , किसके द्वारा बनाया गया इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
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| भादनेर ग्राम जिला रायसेन का प्राचीन मंदिर सामने बना हुआ नया मंदिर जिसमे प्राचीन मूर्तिया रखी हुई है |
मंदिर का वितान साधारण आसान पट्टों पर आधारित मिश्रित स्तंभों पर आधारित है। मुख मंडप के स्तंभ पर साधारण धरणीयों आधारित है. स्तंभ सामान्य रतन पुष्प अलंकरण से अलंकृत है जिस पर वितान आधारित रहा है. कला की दृष्टि से मंदिर 12वीं सदी के अंतिम चरण का प्रतीत होता है. मंडप की दीवार में सामान्य पदलक एवं निचला भाग रतन पुष्प से अलंकृत है। वर्तमान में मंदिर ग्राम के किसी मकान से लगा हुआ है और स्थानीय निवासियों ने इस पर चूना लगा दिया है। मंदिर के पास में ही नवीन मंदिर बने हुए हैं जिसमें कई प्राचीन मूर्तियां जो इसी मंदिर की रही होगी रखी हुई है। मंदिर की मूर्तियों को सिंदूर लगा दिया है।
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| भादनेर ग्राम जिला रायसेन का प्राचीन मंदिर |
Lost Temple of Motalsir मोतलसिर का प्राचीन मंदिर :
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| मोतलसिर बरेली मंदिर के मूर्तियों के अवशेष |
रायसेन जिले में मोतलसिर बरेली के दक्षिण दिशा वामनवाडा से 2 किलोमीटर पूर्व दिशा में एक छोटा सा ग्राम है। किसी समय यह ग्राम काफी बड़ा और महत्वपूर्ण रहा होगा क्योंकि यहाँ पाए गए मंदिर के अवशेष देखकर पता लगता है कि यहाँ का मंदिर काफी भव्य रहा होगा। यहां का विशाल मंदिर वर्तमान में पूरी तरह नष्टप्राय हो चुका है केवल मूर्तियो के अवशेष ही शेष हैं जो आज भी इस बात की गवाही दे रहे हैं यहां पर किसी समय भव्य मंदिर रहा होगा और जैसा की रायसेन के अन्य बहुत से मंदिरों के साथ हुआ यह मंदिर भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। पूरे मंदिर परिसर में विशाल पत्थर के अवशेष यहाँ वहां फैले हुए है।
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| मोतलसिर बरेली मंदिर अवशेष |
यह गांव नर्मदा नदी के निकट स्थित है ऐसी किवदंती है कि पूर्व काल में एक बारात जा रही थी उस बारात को श्राप दिया गया था जिससे पूरी बारात पाषाण के रूप में बदल गयी. यहां पर प्राचीन शिव मंदिर के अवशेष है. मंदिर का सिर ,द्वारा शाखा मंडप,गर्भ गृह कला के स्थापत्य खंड एवं कई प्राचीन प्रतिमा यहां वहां विखरी पड़ी हुई है जिसमें लगभग 12वीं सदी ई बलुआ पत्थर पर निर्मित प्रतिमाओं में प्रथम ललाटविम्ब में उत्कीर्ण शिव प्रतिमा किसी अति प्राचीन शिव मंदिर का हिस्सा है.
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| मोतलसिर बरेली मंदिर के अवशेष |
अलंकृत स्तंभ में देवी देवताओं को उत्कीर्ण किया गया है अंदर और नीचे के स्तर में पांच बैठी हुई आकृतियां फलक में बाएं और दाएं में उत्कीर्ण की गयी हैं. ललाट विम्ब में उत्कीर्ण मध्य की मुख्य प्रतिमा शिव की है जो अष्टभुजी प्रतिमा है. द्वारा शाखा का मध्य भाग खंडित होने से नदी देवी और परिचारक और अन्य आकृतियां नष्ट हो चुकी हैं। तृतीय चंद्रशिला यह प्राचीन शिव मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश द्वार की निचली देहरी है जिसको चंद्रशिला कहते हैं। गर्भ गृह में जाने के लिए इस चंद्रशिला के ऊपर से व्यवस्था रहती है चंद्रशिला मध्य से खंडित है एवं मात्र आधा भाग ही दिखता है।
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| मोतलसिर बरेली मंदिर परिसर में फैली हुई मूर्तिया |
कीर्तिमुख के बायीं ओर पुरुष की दाएं और झुके हुए खड़ी प्रतिमा है उसके बाएं और नर नारी की पांच आकृति हैं यंत्र बजाते नृत्य मुद्रा में उत्कीर्ण किए गए हैं। प्राचीन शिव मंदिर के मंडप में स्थापित सुंदर स्तंभ है जो सीधे खड़े प्राचीन टीले पर विद्यमान है। अब वर्तमान में कोई मंदिर नहीं बचा है सिर्फ मंदिर का प्लेटफॉर्म और कुछ मूर्तियों अवशेष ही बचे हुए है और यदि जल्दी इन्हे सरंक्षित नहीं किया गया तो यह भी धीरे धीरे खत्म हो जायगा और मोतलसिर की विरासत भी खत्म हो जायगी।
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| मोतलसिर मंदिर की मूर्तिया |
आशा है आपको आज का ब्लॉग अच्छा लगा होगा और यदि इसमें कुछ और नयी जानकारी जोड़ना हो तो आप के कमेंट का स्वागत है। यदि आपके आसपास भी कोई इस प्रकार का ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हो तो आप कमेंट में बता सकते है निश्चित ही उसे भी कवर करने का प्रयास करूँगा। अगले ब्लॉग में फिर नए ऐतिहासिक स्थल को लेकर फिर मिलेंगे।
भादनेर और मोतलसिर तक कैसे पहुंचे :
भादनेर ग्राम रायसेन से 07 km की दूरी पर है। रायसेन मुख्यालय से बस या ऑटो से यहाँ तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। मोतलसिर ग्राम बरेली के पास है। बरेली से ऑटो या निजी वहां से यहाँ पहुंचा जा सकता है।
भादनेर और मोतलसिर चित्र दीर्घा :
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| भादनेर ग्राम रायसेन का मंदिर |
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| रायसेन किला |
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| भादनेर ग्राम रायसेन का नया मंदिर |
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| भादनेर ग्राम रायसेन का मंदिर |
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| भादनेर ग्राम रायसेन का मंदिर |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
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| मोतलसिर ग्राम बरेली के मंदिर के अवशेष |
5 Comments
बहुत ही रोचक,ऐतिहासिक जानकारी सर जी
ReplyDeleteGreat 👍
ReplyDeleteउपयोगी जानकारी
ReplyDeleteMain Raisen district se hi hu our aapke blog nirantar padta rahta hu aapke blog bahut hi jankari se bhare huye
ReplyDeleteबहुत शानदार जानकारी सर
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